आश्चर्य

poem on girl child in hindi

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जीवन उपवन में उदित हुई, नन्ही कोमल सी कलिका,

हैं मुदित–मगन ये धरा–गगन, ये पुष्प–गुच्छ ये लतिका,  

करते स्वागत जल–ज्योति–पवन, आनंदित मन है सबका,

क्यों चकित खड़ा, बन के पाहन, कह दे कारण तू इसका,

 

व्रत–पूजन–अर्चन किया बहुत, मंदिर में दान चढ़ाया,

हे मानुष अब फल मिलने पर, मन तेरा क्यों भरमाया,

है परम–सत्य, स्वीकार तू कर, ना कारण कोई भय का, 

फिर क्यों उदास, और है अवाक, कर परित्याग विस्मय का,

 

संतान बिना जब वर्षों तक, जीवन में थी लाचारी,

तू कहता था इस जग में हैं, सब एक समान नर–नारी,

आंगन मेरा भी पुलकित हो, बालक हो या सुकुमारी,

अब भटक रहा अपने प्रण से, क्यों करता चिंता भारी,

 

नौ मास किया करबद्ध नमन, नित वैद्य से किया निवेदन,

एक स्वस्थ निरोगी काया हो, जिसमें हो विकसित तन–मन,

नवजात है आई निर्विकार, किस बात का तुझको चिंतन,

क्यों है निशब्द, कर शंखनाद, अब रहा न सूना आंगन,

 

जब प्रसव काल में समाचार, तेरे कानों तक आया,

था दुष्कर बचना नव–तन का, थी फैली शोक की छाया,

अब हृष्ट–पुष्ट हैं मात–सुता, परमेश्वर की है माया,

क्यों मौन किया धारण तूने, जो मांगा था सब पाया,

 

मिथ्या थे तेरे सब प्रलाप, तू चार–धाम को जायेगा,

दर्शन दे बालक या कन्या, तू हृदय से उसे लगाएगा,

सच्चा है जिसका अंतर्मन, अचरज में ना वो आएगा,

अब छोड़ दे दोहरे मापदंड, तू स्वयं से नयन चुराएगा,

 

लक्ष्मी आईं हैं स्वागत कर, संतोष बड़ा ही पाएगा,

और त्याग दे मन के सब प्रपंच, जो किसी काम ना आएगा,

अपनी तनया को हृदय लगा, अवसाद तेरा मिट जाएगा,

जिस ईश्वर ने है जन्म दिया, भव–पार वही ले जाएगा।

 

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